by admin | Apr 24, 2026 | Uncategorized
ठाकुर जी ने कहा है “जो स्वयं दीप्त नहीं, वे औरों को कैसे उद्दीप्त करेंगे” — बहुत गहरा आध्यात्मिक और व्यवहारिक सत्य बताता है। इसका भाव जैसा मैने समझा :: दीप्त यानी भीतर से जाग्रत, प्रेरित, चरित्रवान, सत्यनिष्ठ और आचरण से प्रकाशित। जो व्यक्ति स्वयं भ्रम, आलस्य,...