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महा-शून्य का संगीत

मैं आदि हूँ, मैं अंत हूँ, पर बीच में बस मौन हूँ, दुनिया जिसे पहचानती, मैं वो नहीं, कोई और हूँ। न नाम है, न रूप है, न देह की दीवार है, अहंकार के उस पार ही, मेरा असली संसार है। वेद कहते—मैं ही ब्रह्म हूँ, गूँजती यह वाणी है, सूफ़ी कहते—अनल हक़, यह सत्य की ही कहानी है। मगर...