by bpnew_admin | May 1, 2026 | Poem
by bpnew_admin | May 1, 2026 | Poem
जग में हाहाकार मचा है, जग से हाहाकार मिटा दे, विश्व-चेतना! मानवता की व्याकुलता को दूर करा दे। स्वार्थ की अंधी दौड़ थमे अब, भीतर का विश्वास जगे बाहर जो मरघट फैला है, उसमें करुणा की प्यास जगा दे। तेरा अंश सनातन, प्राणी बनकर इस जगती में आता, आती मौत समाता तुझ में, लेकिन...
by bpnew_admin | May 1, 2026 | Poem
कौन यहाँ लाता है हम को? कौन यहाँ से ले जाता है? कौन देखता यहाँ नज़ारे? कौन नज़ारे दिखलाता है? जिसके मौन इशारे पर ये, सृष्टि चक्र घुमाया जाता, जो कर्ता होकर भी जग में, अकर्ता ही कहलाता है। कौन फूल कलियों में इतनी सुंदरता को भर देता है? कौन बीज का पेड़ बनाकर, फल का बीज बना...
by bpnew_admin | Apr 28, 2026 | Poem
मैं आदि हूँ, मैं अंत हूँ, पर बीच में बस मौन हूँ, दुनिया जिसे पहचानती, मैं वो नहीं, कोई और हूँ। न नाम है, न रूप है, न देह की दीवार है, अहंकार के उस पार ही, मेरा असली संसार है। वेद कहते—मैं ही ब्रह्म हूँ, गूँजती यह वाणी है, सूफ़ी कहते—अनल हक़, यह सत्य की ही कहानी है। मगर...